विश्व का एकमात्र भुवनेश्वर का प्राचीन लिंगराज हरिहर मंदिर | Lingaraj Temple History | Bhakti Dham
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विश्व का एकमात्र भुवनेश्वर का प्राचीन लिंगराज हरिहर मंदिर | Lingaraj Temple History | Bhakti Dham
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लिंगराज मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि भुवनेश्वर नगर का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया है। दरअसल भगवान शिव की पत्नी को यहां भुवनेश्वरी कहा जाता है। वहीं लिंगराज का अर्थ होता हो, लिंगम के राजा, जो यहां भगवान शिव को कहा जाता है। पहले इस मंदिर में शिव की पूजा कीर्तिवास के रूप में की जाती थी, फिर बाद में हरिहर के रूप में की जाने लगी। भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर शहर का एक मुख्य लैंडमार्क है।
लिंगराज मंदिर भारत के उन मंदिरों में से एक है जिसकी बनावट उत्कृष्ट है। इंटरनेट पर दी गई जानकारी के अनुसार यह 10वीं और 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। इस मंदिर को सोमवंशी राजा जजाति केसरी द्वारा बनवाया गया था। वहीं मंदिर की ऊंचाई 55 मीटर है और इस पर बेहद शानदार नक़्क़ाशी की गई है। मंदिर का निर्माण कलिंग और उड़िया शैली में किया गया है। इसे बनाने के लिए बलुआ पत्थरों का प्रयोग किया गया है। ख़ास बात है कि इस मंदिर के ऊपरी भाग पर उल्टी घंटी और कलश को स्थापित किया गया है, जो लोगों को काफ़ी आश्चर्यजनक लगता है। वहीं इसके शीर्ष हिस्से को पिरामिड के आकार में रखा गया है। अन्य हिंदू मंदिर की तुलना में लिंगराज कुछ कठोर परंपराओं का पालन करता है। यही वजह है कि इस मंदिर के अंदर ग़ैर-हिंदू लोगों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। हालांकि इस मंदिर के बगल में चबूतरा बनवाया गया है ताक़ि दूसरे धर्म के लोग भी इसे आसानी से देख सकें।