महालक्ष्मी का पावन अष्टलक्ष्मी स्तोत्र | धन और वैभव का दिव्य मंत्र | Ashtalakshmi Stotram
Description
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र | माँ महालक्ष्मी की दिव्य स्तुति | धन, सुख, समृद्धि एवं सौभाग्य की प्राप्ति 🌺
माँ महालक्ष्मी के आठ दिव्य स्वरूपों को समर्पित अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का यह पावन प्रस्तुतीकरण आपके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति, वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे।
मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का नियमित श्रवण एवं पाठ करने से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में धन, धान्य, साहस, ज्ञान, सफलता और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
Track – Ashta Lakshmi Stotra
Album - Mahalakshmi
Singer - Shweta Pandit; Chorus
Composer - Ram Dixit
Label - Times Music Spiritual
Video Supervision: - Chetan Garud Productions Studios LLP
Video Edit & VFX: - Chetan Garud Productions Studios LLP
🌸 अष्टलक्ष्मी के आठ स्वरूप:
✨ आदि लक्ष्मी
✨ धन लक्ष्मी
✨ धान्य लक्ष्मी
✨ गज लक्ष्मी
✨ संतान लक्ष्मी
✨ वीर लक्ष्मी
✨ विजय लक्ष्मी
✨ विद्या लक्ष्मी
🙏 इस स्तोत्र को कब सुनें?
• प्रतिदिन प्रातःकाल
• शुक्रवार के दिन
• दीपावली एवं धनतेरस पर
• नवरात्रि के पावन अवसर पर
• लक्ष्मी पूजन के समय
• किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पहले
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जय माँ महालक्ष्मी! 🌺🙏
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Lyrics :
सुमनसवन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये ।।
मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायिनि, मञ्जुळभाषिणि वेदनुते ।।
पङ्कजवासिनि देवसुपूजित, सद्गुणवर्षिणि शान्तियुते ।।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि सदा पालय माम् ।। १ ।।
अहिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि, वैदिकरूपिणि वेदमये ।।
क्षीरसमुद्भव मङ्गलरूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते ।।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम् ।। २ ।।
जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि, मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये ।।
सुरगणपूजित शीघ्रफलप्रद, ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते ।।
भवभयहारिणि पापविमोचनि, साधुजनाश्रित पादयुते ।।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि, धैर्यलक्ष्मि सदा पालय माम् ।। ३ ।।
जयजय दुर्गतिनाशिनि कामिनि, सर्वफलप्रद शास्त्रमये ।।
रथगज तुरगपदादि समावृत, परिजनमण्डित लोकनुते ।।
हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, तापनिवारिणि पादयुते ।।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि, गजलक्ष्मि सदा पालय माम् ।। ४ ।।
अहिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि, रागविवर्धिनि ज्ञानमये ।।
गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि, स्वरसप्त भूषित गाननुते ।।
सकल सुरासुर देवमुनीश्वर, मानववन्दित पादयुते ।।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि, सन्तानलक्ष्मि त्वं पालय माम् ।। ५ ।।
जय कमलासनि सद्गतिदायिनि, ज्ञानविकासिनि गानमये ।।
अनुदिनमर्चित कुङ्कुमधूसर-भूषित वासित वाद्यनुते ।।
कनकधरास्तुति वैभव वन्दित, शङ्कर देशिक मान्य पदे ।।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि, विजयलक्ष्मि सदा पालय माम् ।। ६ ।।
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि, शोकविनाशिनि रत्नमये ।।
मणिमयभूषित कर्णविभूषण, शान्तिसमावृत हास्यमुखे ।।
नवनिधिदायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते ।।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि, विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम् ।। ७ ।।
धिमिधिमि धिंधिमि धिंधिमि धिंधिमि, दुन्दुभि नाद सुपूर्णमये ।।
घुमघुम घुंघुम घुंघुम घुंघुम, शङ्खनिनाद सुवाद्यनुते ।।
वेदपुराणेतिहास सुपूजित, वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते ।।
जयजय हे मधुसूदन कामिनि, धनलक्ष्मि सदा पालय माम् ।। ८ ।।
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