जड़ चेतनि चिर जीविनि | मां विद्यमान कहां नहीं | Powerful Durga Bhajan | Mata Rani Bhajan | Devi Song
Description
मां विद्यमान कहां नहीं एक अत्यंत भावपूर्ण और आध्यात्मिक देवी भजन / माता रानी स्तुति है, जिसमें जगदीश्वरी परमेश्वरी, करुणामयी ममतामयी, भुवनेश्वरी, शक्ति स्वरूपिणी माँ की सर्वव्यापकता का अद्भुत वर्णन किया गया है। इस भजन के हर शब्द में माँ की दिव्य उपस्थिति, शक्ति, करुणा, सृजन, भक्ति, ज्ञान, शांति और मोक्षदायिनी स्वरूप की अनुभूति होती है।
इस सुंदर देवी भक्ति गीत में माँ को जड़ और चेतन, प्रकृति और सृष्टि, जीवन और प्राण, भक्ति और शक्ति, सूर्य-चंद्र-नक्षत्र, वेद-विद्या, अन्न-धन, प्रेम-करुणा और मोक्ष के रूप में वंदन किया गया है। यह भजन न केवल एक स्तुति है, बल्कि भक्त के हृदय में माँ के सर्वव्यापी अस्तित्व का दिव्य अनुभव भी कराता है।
अगर आप Mata Rani Bhajan, Devi Geet, Durga Bhajan, Navratri Bhajan, Maa Durga Songs, Bhakti Geet, Devi Stuti, Mata Ke Bhajan सुनना पसंद करते हैं, तो यह भजन आपके मन को शांति, श्रद्धा और भक्ति से भर देगा।
✨ इस भजन में माँ के दिव्य स्वरूप:
जगदीश्वरी परमेश्वरी
करुणामयी ममतामयी
भुवनेश्वरी मातेश्वरी
भक्ति प्रकाशिनी
अविनाशिनी अघनाशिनी
शक्ति, श्रद्धा, शांति और समाधि की अधिष्ठात्री
जीवन, चेतना, प्राण और सृष्टि की जननी
भोग और मोक्ष प्रदायिनी
सर्वरूप स्वरूपिणी माँ
यह भजन विशेष रूप से Navratri, Durga Ashtami, Chaitra Navratri, Sharad Navratri, Mata Ki Chowki, Jagran, Daily Devi Bhakti, Morning Bhajan, Evening Prayer के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
Title :- Jad Chetni
Singer :- Vidhi Sharma, Anirban Bhattacharya
Music :- Anil Sharma
Lyrics :- Uday Pundhir
Video Supervision - Chetan Garud
Video Edit & VFX - Chetan Garud Productions Studios LLP
Label :- Times Music Spiritual
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Lyrics – मां विद्यमान कहां नहीं
जड़ चेतनि चिर जीविनि, जगदीश्वरि परमेश्वरि
अविनाशिनि अघनाशिनि, करुणामयी ममतामयी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे अंक अक्षर अक्षरी, हे ईश ईश्वर ईश्वरी
हे जीव जीवन जीविनि, हे सत्य शिव चिर सुंदरि ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे प्रकृति नभ घटा दामिनी, हे नाद शब्द निनादिनी
हे ब्रह्म जीव सृजनमयी, हे गंध रस श्रृंगारिणी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
शिवरूपिणि श्रद्धामयी, हे भाव भक्ति प्रकाशिनि
हे ज्योति तम भयहारीणि, हे आश अलख सुहासिनि ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे भाव भक्ति विभोरिणी, हे रंग अंग अघोरिणी
हे बुद्धि तर्क विवेचिनी, प्रारब्ध साठत लेखिनी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे मातु मां मातेश्वरी, हे भू भुवन भुवनेश्वरी
हे चित्त चपला चंचला, हे शांति शांत समाधिनी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे बीज वृष्टि मृदा ऋतु, हे अंकुरित नव आकृति
हे चेतना स्वर सांस तन, मन प्राण घट अन्तःकरण ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे तत्व शब्द स्वरूपिणि, हे आकृति प्रकृति मयी
हे मूल पल्लव पल्लवी, हे वृक्ष पुष्प लतामयी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे आयु जीवन मान धन, जीवन चरण विश्राम क्षण
हे बंधु बांधव मित्र प्रिय, हे राग रीत प्रतीत की ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे आचरण हे अनुकरण, हे आवरण हे आकर्षण
हे आद्या अघ आराधना, हे आत्मा अविनाशिनि ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे दिव्य तेज तपस्विनी, हे शक्ति शिव सहमोदिनी
हे स्तुति परिपूर्ण, हे जीवनी संजीवनी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे वेद विद्या विधिमयी, हे सु सुसज्जित संस्कृति
हे गर्भमय गरिमामयी, हे सृजन शक्ति ईश्वरी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे भरण पोषण पोषिकी, हे अन्न धन भंडारिणी
हे कोटि सूर्य प्रभामयी, शत शत नमन शत साधने ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे मृदुल वाणी वेश जी, हे शांति लक्ष्य प्रवेश जी
हे श्याम श्यामा श्यामली, हे मधुर मुरली तान सी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
ब्रह्मांड कण कण व्यापिनी, हे अंतरिक्ष विहारिणी
हे सृष्टि स्रष्टा सृष्टिमय, हे दृष्टि गोचर अगोचरी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे सूर्य चंद्र नक्षत्र गति, हे परिक्रमा आराध्य की
हे कल्प युग क्षण वर्ष दिन, अक्षांश अंश दिशामयी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे सर्वरूप स्वरूपिणी, हे ईश माया मोहिनी
हे विशिष्ट विनोदिनी, हे हव्य भोग निवेदिते ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे घोर तांडव नर्तकी, हे ब्रह्म नाद प्रवर्तिकी
हे दृश्य दृष्टा दृश्यती, हे सृष्टि शाश्वत परिणति ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे शक्ति साधक साधना, हे पुष्टि पूरण कामना
हे यज्ञ आहुत आहुति, हे अंत अंतर अंतरी
हे कर्म कर्ता कर्मफल, हे भोग मोक्ष प्रदायिनी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
हे योग योगी योगिनी, हे राज राजस राजसी
हे दीन द्रवित दयामयी, हे तम अघोर प्रक्षालिनी ॥
मां विद्यमान कहां नहीं, मां विद्यमान कहां नहीं ॥
जड़ चेतनि चिर जीविनि, जगदीश्वरि परमेश्वरि
अविनाशिनि अघनाशिनि, करुणामयी ममतामयी...
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