केदारनाथ धाम के खुले कपाट, जानें भक्त किस समय कर पाएंगे दर्शन | Keadrnath Dham Ke Darshan
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केदारनाथ धाम के खुले कपाट, जानें भक्त किस समय कर पाएंगे दर्शन | Keadrnath Dham Ke Darshan
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"6 महीने ही होते हैं केदारनाथ के दर्शन
केदारनाथ धान बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ ही चार धाम और पंच केदार में से भी एक है. मान्यता है कि यहां शीतकाल ऋतु में जब 6 महीने के लिए मंदिर के कपाट बंद होते हैं तो पुजारी मंदिर में एक दीपक जलाते हैं. आश्चर्य की बात ये है कि कड़ाके की ठंड में भी ये ज्योत ज्यो की त्यों रहती हैऔर 6 महीने बाद जब यह मंदिर खोला जाता है तब यह दीपक जलता हुआ मिलता है. हर साल भैरव बाबा की पूजा के बाद ही मंदिर के कपाट बंद और खोले जाते हैं. कहते है कि मंदिर के पट बंद होने पर भगवान भैरव इस मंदिर की रक्षा करते हैं.
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा (Kedarnath Jyotirlinga katha)
पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत युद्ध में पांडवों ने विजय प्राप्त कर अपने भाईयों की हत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे.
पाप का प्राश्चित करने के लिए वह कैलाश पर्वत पर महादेव के पास पहुंचे लेकिन शिव ने उन्हें दर्शन नहीं दिए और अंतर्ध्यान हो गए. पांडवों ने हार नहीं मानी और शिव की खोज में केदार पहुंच गए.
पांडवों के आने की भनक लगते ही भोलेनाथ ने बैल का रूप धारण कर लिया और पशुओं के झुंड में मिल गए.
पांडव शिव को पहचान न पाए लेकिन फिर भीम ने अपना विशाल रूप ले लिया और अपने पैर दो पहाड़ों पर फैला दिए. सभी पशु भीम के पैर से निकल गए लेकिन बैल के रूप में महादेव ये देखकर दोबारा अंतरध्यान होने लगे तभी भीम ने उन्हें पकड़ लिया.
पांडवों की भक्ति देखकर शिव प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर सभी पापों से मुक्त कर दिया. तब से ही यहां बैल की पीठ की आकृति पिंड के रूप में शिव को पूजा जाता है."