Mahishasuramardini Stotram | Sacred Durga Mantra for Protection & Strength

Duration: 17:19

Description

The Mahishasuramardini Stotram is one of the most powerful and revered devotional hymns dedicated to Goddess Durga, the divine embodiment of Shakti (power). This sacred stotra glorifies the victory of Goddess Durga over the demon Mahishasura, symbolizing the triumph of good over evil. 🔥🙏
Track - Mahishaasurmardini Stotram
Album - Pratah Smarami
Singer - Usha Mangeshkar, Mayuresh Pai
Label - Times Music Spiritual
Video Supervision: - Chitrapat Media Productions
Video Edit & VFX: - Chitrapat Media Productions

Rendered beautifully by Usha Mangeshkar and Mayuresh Pai, this rendition carries deep devotional energy and spiritual intensity, creating a powerful atmosphere of protection, courage, and divine strength. 🌸✨

🌺 Significance of Mahishasuramardini Stotram:
• Invokes the blessings of Maa Durga for protection and strength
• Removes fear, negativity, and obstacles from life
• Enhances courage, confidence, and inner power
• Celebrates the victory of righteousness over evil
• Brings spiritual upliftment and peace of mind

This stotram is often chanted during Navratri and other sacred occasions to seek divine protection and blessings of Goddess Durga. 🙏

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अयिगिरि नन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्बवनप्रियवासिनि हासरते शिखरिशिरोमणितुङ्गहिमालयशृङ्गनिजालयमध्यगते मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥
अयि शतखण्डविखण्डितरुण्डवितुण्डितशुण्डगजाधिपते रिपुगजगण्डविदारणचण्डपराक्रमशौण्डमृगाधिपते निजभुजदण्डनिपातितखण्डविपातितमुण्डभटाधिपते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥
अयि रणदुर्मदशत्रुवधोदितदुर्धरनिर्जरशक्तिभृते चतुरविचारधुरीणमहाशिवदूतकृतप्रमथाधिपते दुरितदुरीहदुराशयदुर्मतिकाननधूम्रशिखिभृते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥
अयि शरणागतवैरिवधूवरवीरवराभयदायकरे त्रिभुवनमस्तकशूलविरोधिशिरोधिकृतामलशूलकरे दुमिदुमितामरदुन्दुभिनाद-महोमुखरीकृततिग्मकरे जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥
अयि निजहुंकृतिमात्रनिराकृतधूम्रविलोचनधूम्रशते समरविशोषितशोणितबीजसमुद्भवशोणितबीजलते शिवशिवशुम्भनिशुम्भमहाहवतर्पितभूतपिशाचरते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥
धनुरासङ्ग-रणक्षणसङ्ग-परिस्फुरदङ्ग-नटत्कटुके कनकपिशङ्ग-पृषत्कनिषङ्ग-रसद्भटशृङ्ग-हताबटुके कृतचतुरङ्ग-बलक्षितिरङ्ग-घटद्बहुरङ्ग-रदद्वटुके जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥
सुरललना-ततथेयि-तथेयि-कृताभिनयोत्तरनृत्य रते कृतकुकुथः कुकुथो गडदादिकतालकुतूहल-गानरते धुधुकुट धि('''')क्किट धि('''')क्किट धि('''')ध्वनिघोरमृदङ्गमहोत्कटते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥
जय जय जप्यजयेजयशब्द-परस्तुति-तत्पर-विश्वनुते झणझणझिञ्झिति-झिञ्कृत-नूपुर-सिञ्जित-मोहितभूतपते नटित-नटाधिल-नटनायक-नाटित-नाट्यसुगानरते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥
अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहरकान्तियुते श्रितरजनीरजनीरजनीरजनीरजनीकरवक्त्रवृते सुनयनविभ्रमरभ्रमरभ्रमरभ्रमरभ्रमराधिपते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥
सहितमहाहवमल्लमतल्लिक-मल्लितरल्लक-मल्ल रते विरचितवल्लिक-पल्लिक-मल्लिक-झिल्लिक-भिल्लिक-वर्गवृते शितकृतफुल्ल-समुल्लसितारुण-तल्लज-पल्लव-सल्ललिते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥
अविरलगण्डगलन्मदमेदुर-मत्तमतङ्गजरजपते त्रिभुवनभूषणभूतकलानिधि-रूपपयोनिधिराजसुते अयि सुदतीजनलालसमानस-मोहनमीनमकारसुते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥
कमलदलामलकोमलकान्ति-कलाकलितामलभाललते सकलविलासकलानिलयक्रम-केलिचलत्कलहंसकुले अलिकुलसङ्कुलकुवलय-मण्डल-मौलिमिलद्बकुलालिकुले जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥
करमुरलीरववीजितकूजित-लज्जितकोकिलमञ्जुमते मिलितपुलिन्दमनोहरगुञ्जित-रञ्जितशैलनिकुञ्जगते निजगणभूत-महाशबरीगण-सद्गुणसंभृतकेलिधृते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥
कटितटपीतदुकूलविचित्र-विजृम्भितपीवर-स्तनते परसितसन्नट-पट्टिकशक्ति-विचित्रित-गुह्यविचित्रपदे अधिरथ-रुद्रमहारथ-रौद्र-भटारथ-सङ्कुल-वन्द्यपदे जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥
अहरह-रर्ह-सहस्र-मथान-मथन्मथ-मथन्मथ-मथन्मथते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते दनुज-निरोषिणि दितिसुत-रोषिणि दुर्मद-शोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥
अयि निजहुंकृतिमात्रनिराकृतधूम्रविलोचनधूम्रशते शमितविशोषितशोणितबीजसमुद्भवशोणितबीजलते दनुजविपाकृत-बन्धुसुतार्थ-कृतप्रलयं-करधूम्रलते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥
अयमभिनन्दित-भृङ्गणसन्तत-सन्तति-सन्तत-सन्ततिते सुरवर-इन्द-गजेन्द्र-महेन्द्र-दिवेन्द्र-महेन्द्र-सुवन्दितते तत-विद्युत-तत-तत-तत-तत-तत-विद्युत-तत-सूत-महेन्द्र-सुते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥
अयि निजहुंकृति-मात्रनिराकृत-धूम्रविलोचन-धूम्रशते शमितविशोषित-शोणितबीज-समुद्भव-शोणितबीजलते दनुजविपाकृत-बन्धुसुतार्थ-कृतप्रलयं-करधूम्रलते जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥

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