Bhagwat Geeta Adhyay 15 Hindi | गीता सार | Dharmik Katha | Bhagwat Katha | Adhik Maas Special
Description
🙏 **Bhagwat Geeta Adhyay 15 Hindi | गीता सार | Adhik Maas Special** 🙏
"Bhagwat Geeta Adhyay 15" जिसे *Purushottam Yog* के नाम से भी जाना जाता है, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया एक अत्यंत गूढ़ और दिव्य ज्ञान है। इस अध्याय में जीवन, आत्मा, संसार और परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का वर्णन किया गया है। 🌿🕉️✨
गीता का यह अध्याय हमें सिखाता है कि यह संसार एक उल्टे वृक्ष की तरह है जिसकी जड़ें परमात्मा में हैं। श्रीकृष्ण बताते हैं कि जो व्यक्ति मोह, अहंकार और आसक्ति से मुक्त होकर भगवान की शरण में आता है, वही सच्चे सुख और मोक्ष को प्राप्त करता है। 🙏
"Bhagwat Geeta Adhyay 15 Hindi" सुनने से मन शांत होता है और जीवन को सही दिशा मिलती है। Adhik Maas ke pavitra avsar par Geeta ka paath aur shravan bahut hi shubh maana jata hai. Yeh Dharmik Katha aur Geeta Saar bhakton ko spiritual wisdom aur positivity se bhar deta hai. 🌸📖
🕉️ **Bhagwat Geeta Adhyay 15 Ke Fayde (Benefits):**
• Jeevan mein spiritual clarity aur wisdom laata hai
• Mann ko shaanti aur positivity deta hai
• Stress aur confusion ko door karta hai
• Bhagwan Krishna ki bhakti aur faith ko majboot karta hai
• Dharma aur satya ke marg par chalne ki prerna deta hai
⏰ **Best Time to Listen:**
• Subah Brahma Muhurat mein
• Adhik Maas aur Ekadashi ke din
• Daily spiritual study aur meditation ke samay
• Sone se pehle mind ko peaceful banane ke liye
Bhagwan Shri Krishna ka yeh divine Geeta Saar aapke jeevan mein gyaan, bhakti aur shanti lekar aaye 🙏🕉️
🎶 **Credits:**
Song - Shrimad Bhagavad Gita Hindi Adhyay 15 Purushottam Yog
Singers - Roopkumar Rathod, Suresh Wadkar, Sanj V
Revered Mentor & Guide - Guruji Shri G. Narayan
Translation & Supervision - Hasmukh Upadhyay under the guidance of Guruji Shri G. Narayan (Hindi)
Music Director, Mixing and Mastering - Anand Kurhekar
Overall Project Creative Director - Kshitij Nagwekar
Video Supervision - Chetan Garud
Video Edit & VFX - Chetan Garud Productions Studios LLP
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Lyrics
श्रीमद् भगवद् गीता उपनिषद् का 15वाँ अध्याय पुरुषोत्तम योग।
जग रूपी पीपल वृक्ष के आदि पुरुष मूल है,
ब्रह्म शाखा वेद पत्ते वेद ज्ञाता ज्ञानी अनुकूल है।
तीनों गुणों से पोषित शाखा ऊपर नीचे फैली है,
मनुष्य लोक को सकाम कर्म में जड़ें बांधे रखती है।
ना आदि ना अंत है इसका नहीं आधार,
अनंत वासना मूल वाली जड़ पे करो शस्त्र से वार।
खोजो स्थान जहां जाके फिर आना ना पड़े,
शरण पाओ उस प्रभु की जो सबका विस्तार करे।
मोह कुसंगति से मुक्त जो शाश्वत तत्व को जानते,
सुख दुख से मुक्त मोह रहित शाश्वत राज्य को है पाते।
ना सूर्य चंद्र अग्नि से धाम मेरा प्रकाशित किया जाता,
परम पद प्राप्त करे प्राणी वहां से लौट के नहीं आता।
देह में सनातन जीवात्मा मेरा ही अंश होता है,
मेरे मन और इंद्रियों को वही तो आकर्षित करता है।
वायु जैसे गंध को ग्रहण करके ले जाता,
वैसे ही जीवात्मा मन इंद्रियों को ग्रहण करके ले जाता।
श्रोत्र चक्षु त्वचा घ्राण मन का सहारा लेकर,
विषय सेवन करे जीवात्मा विषयों में रत होकर।
मरते हुए को जीते हुए को विषय भोगों में लिप्त को,
ज्ञानी ही त्रिगुणों संयुक्त को जाने मूर्ख ना जाने उसको।
प्रयत्न करे योगी तो आत्मतत्व को पहचाने,
मूर्ख प्रयत्न करके भी नहीं आत्मतत्व को जाने।
सूर्य चंद्र में प्रकाश तथा अग्नि में है जो तेज,
है उत्पन्न वो मुझसे ही मेरा ही है वो तेज।
कर पृथ्वी में प्रवेश मैं ही सब भूतों को धारण करता,
अमृतमय चंद्रमा होकर वनस्पतियों का पोषण करता।
मैं ही प्राणियों के तन में बनके स्थित हूँ प्राण,
मैं ही अन्न पचाता बनके अग्नि रूप प्राण अपान।
सब में अंतर्यामी मैं मुझसे स्मृति ज्ञान,
वेदों का जानने वाला तथा वेद कर्ता मुझे मान।
दो प्रकार के पुरुष जग में नाशवान और अविनाशी,
नाशवान है शरीर और जीवात्मा है अविनाशी।
इनसे भी उत्तम पुरुष परमेश्वर परमात्मा होता,
तीनों लोकों का पालन पोषण वही अविनाशी है करता।
नाशवान जड़ वर्ग क्षेत्र से सर्वथा मैं दूर हूँ,
जीवात्मा से भी उत्तम पुरुषोत्तम नाम से प्रसिद्ध हूँ।
जो ज्ञानी मुझे तत्व से पुरुषोत्तम है जानता,
वो सर्वज्ञ पुरुष सब कुछ मुझ वासुदेव को मानता।
हे अर्जुन यह गुह्य शास्त्र मैंने तुम्हें समझाया है,
तत्व से जान कृतार्थ हो जा ज्ञान जो मुझसे पाया है।
यहां ब्रह्म विद्या योग शास्त्र के श्री कृष्ण अर्जुन संवाद,
श्रीमद् भगवद् गीता उपनिषद् का 15वाँ अध्याय पुरुषोत्तम योग समाप्त।
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